एक गाँव में रामू नाम का एक मेहनती किसान था। वो सुबह से शाम तक अपने खेत में कड़ी मेहनत करता था, लेकिन गरीबी उसका पीछा नहीं छोड़ती थी।
एक दिन, जब रामू हल चला रहा था, तो उसे मिट्टी के अंदर एक पुरानी थैली मिली। उसमें चमकते हुए सोने के सिक्के भरे थे।
रामू ने सोचा, 'यह धन मेरा नहीं है। मुझे इसे उसके असली मालिक तक पहुँचाना होगा, चाहे कुछ भी हो जाए।'
वह तुरंत थैली लेकर गाँव के मुखिया के पास गया। मुखिया ने पूरे गाँव में इसकी घोषणा करवा दी, ताकि असली मालिक मिल सके।
कुछ दिनों बाद, एक अमीर व्यापारी आया और उसने सारे सबूत दिखाए। उसने बताया कि थैली उसकी ही थी, जो सालों पहले खो गई थी।
रामू ने बिना किसी लालच के थैली व्यापारी को लौटा दी। उसकी ईमानदारी देखकर व्यापारी बहुत हैरान और खुश हुआ।
व्यापारी ने रामू को बड़ा इनाम देना चाहा, लेकिन रामू ने मुस्कुराकर कहा, 'मेहनत की कमाई ही मेरे लिए सबसे बड़ा धन है।'
यह उसकी ईमानदारी ही थी जिसने उसे गाँव में सबसे सम्मानित व्यक्ति बना दिया। सच्चे कर्मों का फल हमेशा मीठा होता है।